गुवाहाटी में असम की सियासत ने नया मोड़, 500 नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस का थामा दामन

असम
गुवाहाटी में शुक्रवार को हुए एक खास कार्यक्रम में असम की सियासत ने नया मोड़ लिया, जब लगभग 500 नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थाम लिया। इस मौके पर टीएमसी सांसद सुष्मिता देव और असम टीएमसी अध्यक्ष रमन बोरठाकुर की मौजूदगी रही। कांग्रेस, असम गण परिषद (एजीपी), असम जातीय परिषद (एजेपी) और भाजपा समेत कई पार्टियों के नेताओं का टीएमसी में शामिल होना मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

ये भी पढ़ें :  Netflix–YouTube के 18+ कंटेंट पर आधार वेरिफिकेशन की सलाह, CJI सूर्यकांत का बड़ा सुझाव—क्या सरकार मानेगी?

सुष्मिता देव ने कहा कि इन नेताओं को उनकी पार्टियों में नजरअंदाज किया जा रहा था, जिसकी वजह से उन्होंने टीएमसी का रुख किया। उन्होंने जोर देकर कहा, "टीएमसी एक जमीनी कार्यकर्ताओं की पार्टी है और हम असम में एक मजबूत टीम बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा के खिलाफ कांग्रेस से सीधी लड़ाई में भाजपा जीतती है, लेकिन जब लड़ाई टीएमसी, डीएमके या समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियों से होती है, तो भाजपा हारती है। इसलिए असम के लोगों को राष्ट्रीय पार्टियों की बजाय क्षेत्रीय पार्टियों को प्राथमिकता देनी चाहिए।"

ये भी पढ़ें :  बंगाल में तनाव: भीड़ ने तोड़ी लेनिन की मूर्ति, कांग्रेस ने TMC दफ्तर पर किया कब्जा

भारी संख्या में नेताओं का टीएमसी में शामिल होना असम में भाजपा के लिए चिंता का सबब हो सकता है। टीएमसी जो अब तक बंगाल की राजनीति में प्रभावशाली रही है, अब असम में अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। करीब 17-18 समुदायों के नेताओं का टीएमसी में शामिल होना इस बात का संकेत है कि पार्टी राज्य में एक मजबूत विकल्प बनने की तैयारी कर रही है।

ये भी पढ़ें :  पीएम मोदी से नियुक्ति पत्र पाकर झूमे युवा, बोले– अब ‘विकसित भारत’ का हिस्सा बनने का सपना हुआ पूरा

भाजपा के लिए यह नई चुनौती हिमंता सरमा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है, क्योंकि टीएमसी का फोकस अब असम में भाजपा के खिलाफ प्रभावी गठजोड़ बनाने पर है। अब देखना हो गा कि ममता बनर्जी की पार्टी का यह कदम असम की राजनीति में बड़ा बदलाव लाएगा या नहीं।

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment